New Delhi: बचपन में जब बच्चों के मन में किसी के प्रति मदद की भावना विकसित हो जाए तो ये भावना जिंदगी भर आपके साथ रहती है. कर्नाटक का रहने वाला 12 साल का वेंकटेश इतनी कम उम्र में बहादुरी की वो परिभाषा लिख डाला जिसकी कल्पना भी इस नन्हें बच्चे से नहीं की गई होगी. वेंकटेश को भारतीय बाल कल्याण परिषद द्वारा राष्ट्रीय वीरता पुरस्कार 2019 से नवाजा जा चुका है.

अगस्त 2019 में इस बच्चे ने सभी बाधाओं के खिलाफ जाकर कर्नाटक के रायचूर जिले में एक डूबे हुए पुल के माध्यम से एम्बुलेंस की मदद करने के लिए अपनी जान जोखिम में डाल दी थी. एम्बुलेंस छह बच्चों और एक महिला के शव को ले जा रही थी.

12 साल के वेंकटेश अपने दोस्तों के साथ खेल रहा था, जब उसने जल स्तर बढ़ने के कारण पुल पर एक एम्बुलेंस को देखा.. उन्होंने तुरंत स्वेच्छा से ड्राइवर को बाढ़ वाले पुल से गुजरने के लिए मार्गदर्शन देकर मदद करने के लिए कहा..

वेंकटेश को अब उनकी बहादुरी के लिए पहचाना जा रहा है और भारतीय बाल कल्याण परिषद (ICCW) द्वारा उन्हें राष्ट्रीय वीरता पुरस्कार 2019 के लिए सम्मानित किया गया है..यह पुरस्कार गणतंत्र दिवस पर पूरे भारत के 26 बच्चों के साथ प्रदान किया गया था.

वेंकटेश ने कहा- “मुझे पता नहीं है कि मैंने जो किया वह बहादुरी का काम था या नहीं.. मैं बस ड्राइवर की मदद करना चाहता था.. उन्होंने बाद में कहा, “एम्बुलेंस के ड्राइवर ने मुझसे पूछा कि क्या वह पुल पर एम्बुलेंस चला सकता है.. मैंने रास्ता दिखाया.. मुझे नहीं पता कि मदद, बहादुरी, आदि का क्या मतलब है..

वेंकटेश का वीडियो सोशल मीडिया पर पोस्ट किया गया था. जिसने पूरे देश को बहादुरी का परिचय दिया. कुछ दिन में ही वीडियो कई अन्य प्लेटफार्मों पर वायरल हो गया और वेंकटेश को एक नायक के रूप में माना गया..

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Naina Shrivastava

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