New Delhi: कभी कभी हम हमारी मजबूरी को हमारी असफलता समझ लेते हैं. और अक्सर ये लड़कियों के साथ ज्यादा होता है. आज हम आपको एक ऐसी ही कहानी बताते हैं, जो आपकी सोच बदल देगी.

ये कहानी है उत्तराखंड के एक छोटे से गांव की रहने वाली मधुशाला तिवारी की. मधुशाला के पिता की गांव में थोड़ी सी जमीन थी, जिसमें उसकी मां खेती करते थी, औऱ पिता कपड़ों की बुनाई का छोटा सा व्यापार करते थे.

मधुशाला कस्बे में एक सरकारी स्कूल में पढ़ने जाया करती थीं. पर स्कूल के सार्वजनिक प्रोग्राम में बालिका शोषण पर प्रस्तुति देनी थी. इसमें उन्हें एक पुलिस वाले का किरदार निभाने के लिए दिया गया था. जिसे उन्होंने बड़े ही सच्चे लगन से निभाया था. इसके बाद मधुशाला ने अपने प्रधान अध्यापक से IPS ऑफिसर के बारे में सारी जानकारी ली. और वह बहुत प्रभावित हुए.

मधुशाला के पिता की आय बेहद सामान्य थी. इतनी नहीं थी कि वह मधुशाला के सारे सपनों को पूरा कर सकें. मधुशाला के माता-पिता को सिर्फ इतना ही चाहते थे कि उसे सिलाई-कढ़ाई सिखाकर उसकी शादी करा दें. पर मधुशाला अपना सपना पूरा करना चाहती थी, लेकिन उसे नहीं पता था कि वह आगे चलकर क्या करना चाहती थी. उसने कितनी कठिन राह चुनी थी.

मधुशाला 10वीं क्लास 80 फीसदी नंबर से पास की थी. मधुशाला एक खूबसूरत और होनहार थी. सपना पूरा करने के लिए मधुशाला ने शादी के बाद भी पढ़ाई जारी रखी थी.. 12वीं में 85 फीसदी अंक हासिल करने के बाद वह दिल्ली जाकर आईपीएस बनना चाहती थी.

आईपीएस बन सके इसलिए मधुशाला ने अपना ससुराल भी छोड़ दिया था. वह ससुराल से बाहर आकर अब आईपीएस की पढ़ाई शुरू की. गांव में लड़कियों को सिलाई और कढ़ाई सिखाती और बचे पैसों को अपने पढ़ाई में लगाती. उसने अपनी तैयारी जारी रखी. पहली बार में वह असफल रही लेकिन हार नहीं मानी. मधुशाला दिल्ली गई और 6 महीने की कठोर तपस्या में उसने खुद को झोंक दिया. आखिरकार सपनों को पूरा किया, पिता ने जमीन बेचकर अपनी बेटी को पढ़ाया. पति को भी तलाक दे दिया. मधुशाला आज एक IPS ऑफिसर है.

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Naina Shrivastava

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