New Delhi: कहते हैं सफल जीवन के लिए आपका जुनूनी होता बेहद जरूरी है. आज हम आपको छत्तीसगढ़ राज्य के एक होनहार युवक के बारे में बता रहे हैं. जिसने संघर्ष कर सफलता की वो सीढ़ी चढ़ी जो उसके लिए आसान नहीं थी. लेकिन जहां चाह वहां राह है कहावत इस युवक के लिए सही साबित हुई.

हम बात कर रहे हैं छत्तीसगढ़ के पहले आईएएस ऑफिसर ओपी चौधरी की. जिसने तमाम संघर्ष और गरीबी झेलकर IAS अफसर बनकर दिखाया. ओपी चौधरी ने 8 साल की उम्र में अपने पिता को खोया और फिर अपनी मां के साथ दर-दर की ठोकरें खाईं.

उसने पढ़ाई भी एक ऐसे स्कूल से की जहां छत भी ठीक से बनी नहीं थी. और 12वीं पास के बाद मां ने पिता की अनुकंपा वाली नौकरी लेने से मना कर दिया. और अपने बेटे से कहा- जा कुछ बड़ा कर.

जब वह फर्स्ट ईयर में थे, तो मसूरी में आईएएस की ट्रेनिग देखने गए लेकिन वहां गार्ड ने उन्हें अंदर जाने से मना कर दिया. धक्के देकर बाहर निकाल दिया. उस दिन ही उसने एक सपना पाला एक IAS अधिकारी बनने का. और पहुंच गया अपने सपने लेकर दिल्ली. कभी रेलवे स्टेशन पर सोया तो कभी कब्रिस्तान पर.

लेकिन इस बीच उसने अपनी सबसे बड़ी प्रेरणा अपनी बड़ी दीदी को खो दिया. उसके बाद उसने अपने सपने को पाया जिसके लिए उसने खूब मेहनत की. और छत्तीसगढ़ का पहला IAS अफसर बनकर दिखाया. और साबित कर दिया कि नामुमकिन कुछ नहीं. वह नवयुवकों के लिए एक आदर्श औऱ मिसाल हैं.

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Naina Shrivastava

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