New Delhi: जो लोग सफलता की ऊंचाईयों को छूते हैं, आकाश की बुलंदियों को छूते हैं. उनमें से ज्यादातर लोग बड़े ही संघर्ष, मुश्किलों का मुसीबतों का सामना करते हैं. सफल लोग अपनी मेहनत, लगन और अलग सोच से सारी मुश्किलों और मुसीबतों पर विजय पाकर एक अलग पहचान बनाते हैं. और एक अलग मुकाम हासिल करते हैं.

आज की हमारी कहानी एक ऐसे शख्स के बारे में है जिन्होंने अपने संघर्ष के दिनों में होटलों में कमरे तक साफ किए और पेट भरने के लिए टैक्सी तक चलाई. लेकिन आज वही शख्स भारत के बड़े बिजनेसमैन और सबसे अमीर व्यक्ति में शामिल हैं.

हम बात कर रहे हैं Mukesh Miki Jagatyani की. जो दुबई के लैंड मार्क ग्रुप के मालिक हैं. जिनकी संपत्ति 45 हजार करोड़ है. मुकेश का जन्म कुवैत में हुआ था. उनकी प्रारंभिक शिक्षा मुंबई से हुई. मुकेश एक छोटे कारोबारी के घर पैदा हुए थे, इसलिए उनके जेहन में शुरुआत से ही कारोबार करने में दिलचस्पी थी. लेकिन घर वालों के दवाब के कारण मिकी को अकाउंटिंग पढ़ने के लिए लंदन भेज दिया गया था.

लेकिन पढ़ाई में उन्हें जरा भी दिलचस्पी नहीं थी, इसलिए उन्होंने पढ़ाई बीच में ही रोक दी. और अपना बिजनेस शुरू करने का फैसला किया. लेकिन इस दौरान मुकेश के सामने सबसे बड़ी चुनौती थी खुद का पेट भरना. औऱ लंदन जैसे शहर में बिना पढ़ाई लिखाई के अच्छा काम मिलना मुश्किल था. इसलिए उन्होंने होटल में कमरा साफ करने का काम शुरू किया.

लेकिन इस काम से उन्हें दो वक्त का खाना भी नसीब नहीं होता था, इसलिए उन्होंने टैक्सी चलाने का फैसला लिया. और रात में लंदन की सड़कों पर टैक्सी भी चलाया. लगभग एक साल तक ये सब करने के बाद जब वह घर पहुंचे तो बीमारी की वजह से उनके माता पिता का निधन हो गया.

21 साल की उम्र में ही वह बिना परिवार, बिना नौकरी और बिना किसी कॉलेज डिग्री के बिल्कुल अकेले पड़ गए थे. इसके बाद उन्होंने घर का पुराना बिजनेस बेबी प्रोड्क्ट को फिर से शुरू किया. जिसमें बच्चों से संबंधित सारे सामान मिलते.

उनकी मेहनत और लगन से ये धंधा उनका चल निकला. इसके बाद उन्होंने एक दुकान खरीदा जिसका नाम उन्होंने बेबी शॉप रखा. और देखते ही देखते उनका ये काम 6 स्टोर और 400 कर्मचारी तक फैल गया. आज उनकी कंपनी 18 देशों में फैली हुई है. मुकेश आज इतने बड़े साम्राज्य के मालिक हैं, लेकिन उन्होंने अपने बचपन और गरीबी को कभी नहीं भूला. वह हर गरीब की मदद के लिए तैयार रहते हैं.

साल 2000 में उन्होंने लाइफ फाउडेंशन की शुरुआत की. जिसके अंतर्गत करीब 1 लाख बच्चों की पढ़ाई-लिखाई से लेकर उनके इलाज का सारा जिम्मा मुकेश ने संभाल रखा है.

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Naina Shrivastava

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