New Delhi: Sakat Chauth: एक बार विपदाग्रस्त देवता भगवान शंकर के पास गए.. उस समय भगवान शिव के पास स्वामी कार्तिकेय तथा गणेश भी विराजमान थे.. शिव जी ने दोनों बालकों से पूछा- ‘तुम में से कौन ऐसा वीर है जो देवताओं का कष्ट निवारण करे?’ तब कार्तिकेय ने स्वयं को देवताओं का सेनापति प्रमाणित करते हुए देव रक्षा योग्य तथा सर्वोच्च देव पद मिलने का अधिकारी सिद्ध किया.. यह बात सुनकर शिव ने गणेश की इच्छा जाननी चाही.. तब गणेश ने विनम्र भाव से कहा- ‘पिताजी! आपकी आज्ञा हो तो मैं बिना सेनापति बने ही सब संकट दूर कर सकता हूं।’

यह सुनकर हंसते हुए शिव ने दोनों लड़कों को पृथ्वी की परिक्रमा करने को कहा तथा यह शर्त रखी- ‘जो सबसे पहले पूरी पृथ्वी की परिक्रमा करके आ जाएगा वही वीर तथा सर्वश्रेष्ठ देवता घोषित किया जाएगा.. यह सुनते ही कार्तिकेय बड़े गर्व से अपने वाहन मोर पर चढ़कर पृथ्वी की परिक्रमा करने चल दिए। गणेश ने सोचा कि चूहे के बल पर तो पूरी पृथ्वी का चक्कर लगाना अत्यंत कठिन है, इसलिए उन्होंने एक युक्ति सोची..

वे 7 बार अपने माता-पिता की परिक्रमा करके बैठ गए.. रास्ते में कार्तिकेय को पूरे पृथ्वी मण्डल में उनके आगे चूहे के पद चिह्न दिखाई दिए.. परिक्रमा करके लौटने पर निर्णय की बारी आई.. कार्तिकेय जी गणेश पर कीचड़ उछालने लगे तथा स्वयं को पूरे भूमण्डल का एकमात्र पर्यटक बताया..इस पर गणेश ने शिव से कहा- ‘माता-पिता में ही समस्त तीर्थ निहित हैं, इसलिए मैंने आपकी 7 बार परिक्रमाएं की हैं..’

गणेश की बात सुनकर समस्त देवताओं तथा कार्तिकेय ने सिर झुका लिया.. तब शंकर जी ने उन्मुक्त कण्ठ से गणेश की प्रशंसा की तथा आशीर्वाद दिया- ‘त्रिलोक में सर्वप्रथम तुम्हारी पूजा होगी..’ तब गणेश ने पिता की आज्ञानुसार जाकर देवताओं का संकट दूर किया..

यह शुभ समाचार जानकर भगवान शंकर ने अपने चंद्रमा को यह बताया कि चौथ के दिन चंद्रमा तुम्हारे मस्तक का सेहरा (ताज) बनकर पूरे विश्व को शीतलता प्रदान करेगा.. जो स्त्री-पुरुष इस तिथि पर तुम्हारा पूजन तथा चंद्र अर्ध्यदान देगा.. उसका त्रिविधि ताप (दैहिक, दैविक, भौतिक) दूर होगा और एश्वर्य, पुत्र, सौभाग्य को प्राप्त करेगा.. यह सुनकर देवगण हर्षातिरेक में प्रणाम कर अंतर्धान हो गए..

सकट चौथ के दिन विद्या-बुद्धि-वारिधि, संकट हरण गणेश तथा चंद्रमा का पूजन किया जाता है.. यह व्रत संकटों तथा दुखों को दूर करने वाला तथा प्राणीमात्र की सभी इच्छाएं व मनोकामनाएं पूरी करने वाला है..यह व्रत माघ माह में कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि के दिन किया जाता है..

साभार- विकिपीडिया

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Naina Shrivastava

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