New Delhi: सकट चौथ के दिन विद्या-बुद्धि-वारिधि, संकट हरण गणेश तथा चंद्रमा का पूजन किया जाता है.. यह व्रत संकटों तथा दुखों को दूर करने वाला तथा प्राणीमात्र की सभी इच्छाएं व मनोकामनाएं पूरी करने वाला है..यह व्रत माघ माह में कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि के दिन किया जाता है..

सकट चौथ को ‘तिल चौथ’ या ‘माही चौथ’ के नाम से भी जाना जाता है.. गणेश जी ने इस दिन देवताओं की मदद करके उनका संकट दूर किया था.. तब शिव ने प्रसन्न होकर गणेश को आशीर्वाद देकर कहा कि आज के दिन को लोग संकट मोचन के रूप में मनाएंगे.. जो भी इस दिन व्रत करेगा, उसके सब संकट इस व्रत के प्रभाव से दूर हो जाएंगे..

महत्त्व
सकट चौथ का उपवास जो भी भक्त संपूर्ण श्रद्धा व विश्वास के साथ करता है, उसकी बुद्धि और ऋद्धि-सिद्धि की प्राप्ति होने के साथ-साथ जीवन में आने वाली विघ्न बाधाओं का भी नाश होता है.. सभी तिथियों में चतुर्थी तिथि श्री गणेश को सबसे अधिक प्रिय है..

व्रत विधि
इस दिन स्त्रियां निर्जल व्रत करती हैं.. एक पटरे पर मिट्टी की डली को गणेश जी के रूप में रखकर उनकी पूजा की जाती है और कथा सुनने के बाद लोटे में भरा जल चंद्रमा को अर्ध्य देकर ही व्रत खोला जाता है.. रात्रि को चंद्रमा को अर्ध्य देने के बाद ही महिलाएं भोजन करती है.. सकट चौथ के दिन तिल को भूनकर गुड़ के साथ कूटकर तिलकुटा अर्थात तिलकुट का पहाड़ बनाया जाता है.. कहीं-कहीं तिलकुट का बकरा भी बनाया जाता है.. उसकी पूजा करके घर का कोई बच्चा उसकी गर्दन काटता है, फिर सबको प्रसाद दिया जाता है..

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Naina Shrivastava

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