New Delhi:अब्दुल रहमान मालबारी.. तीन अन्य लोगों की टीम के साथ गुजरात का ऐसा नाम जो COVID -19 के इन गंभीर दिनों में मानवता का उद्धारक बन गया है.. जिसने ना जात देखा ना धर्म, कोरोना काल जैसे भयानक हालातों में उसने सिर्फ अपने कर्तव्य का पालन किया.

अब्दुल रहमान मालबारी एकता ट्रस्ट नाम से एक संस्था चलाते हैं, जो पिछले तीन दशकों से लावारिस श’वों का अं’तिम सं’स्कार करने का काम करती है.. उन्होंने अपने काम के लिए अनेकों बार सुर्खियां बटोरीं हैं. कोरोना काल में फिर से अब्दुल रहमान हिंदू कोरोना पीड़ितों के अंतिम संस्कार करने के लिए सुर्खियों में आए. वो और उनकी टीम ने इस दौरान बखूबी अपने कर्तव्यों का पालन किया, और हिंदू कोरोना पीड़ितों का अंतिम संस्कार हिंदु रीति रिवाजों से कियां

मालबारी की निरंतर सेवा
62 वर्षीय अब्दुल रहमान मालबारी अपने जीवन के अधिकांश समय के लिए शव एकत्र करते रहे .. दायित्व निभाने वाले के रूप में अब्दुल मालबारी ने कुछ सबसे खराब आपदाएं देखी हैं -जिसमें 1998 गुजरात चक्रवात, 2001 भुज भूकंप, 2013 केदारनाथ बाढ़ और अब सूची में 2020 का कोविड भी जुड़ गया है.

मृतकों को दफनाने या उनका दाह संस्कार करने या उनके धर्म के अनुसार उनकी अंतिम क्रिया करने का काम कर रहे हैं…उन्होंने हमेशा उन लोगों के लिए इन सभी संस्कारों में अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने की कोशिश की है जिनके जो लावारिश थे.

मार्च के बाद से जब COVID -19 देश में आया, तो सूरत प्रशासन ने उसके साथ हाथ मिला लिया, जो वायरस के कारण मारे गए लोगों का अंतिम संस्कार करते थे। उनकी लगातार सेवा के कारण, सूरत नगर निगम ने उनके संगठन, एकता ट्रस्ट को काम सौंपा..इन वर्षों में, उन्होंने 70,000 से अधिक श’वों का अंतिम संस्कार किया है.

अपने काम के बारे में बात करते हुए, एकता ट्रस्ट के अध्यक्ष ने मालबारी ने कहा कि उनका मानना ​​है कि मानवता ही सच्चा धर्म है और मानव का कर्म ही एकमात्र ऐसा काम है जो मायने रखता है.. उन्होंने कहा कि यदि कोई किसी भी धर्म के धार्मिक ग्रंथों को पढ़ता है तो वे समझेंगे कि उनमें से प्रत्येक पहले मानवीय होने पर ध्यान केंद्रित करता है।

हो चुके हैं कोरोना संक्रमित
अंतिम संस्कार करते समय टीम सभी आवश्यक उपाय करती है.. फिर भी दुर्भाग्य से, मालबारी मार्च में कोरोना वायरस से संक्रमित हो गए थे. भगवान की कृपा से वह बीमारी से बच गए, और ठीक हो गए. तब भी उन्होंने अपना काम जारी रखने में कोई संकोच नहीं किया. और लगातार अपना काम करते रहे. हम अब्दुल रहमान की भावना को सलाम करते हैं!

About Author

Naina Shrivastava

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *