New Delhi: शिवानी 10 साल की थी. जब उसके साथ पहली बार यौ’न शोषण हुआ था. अब वह बच्चों को यौ’न शिक्षा के बारे में शिक्षित करने के लिए ‘ब्रेक द साइलेंस’ आंदोलन की शुरूआत की है. ताकि किसी के साथ भी ऐसा भयानक हादसा ना हो.

पढ़िए शिवानी की दिल को छू लेने वाली कहानी

‘मैं सिर्फ 10 साल की थी, जब मैं पहली बार यौ’न शोष’ण का शिकार हुई थी. शिवानी अग्रवाल ने अपनी कहानी शेयर की ताकि हर लड़की प्रेरणा लेकर खुद को एक नई जिंदगी दे सके. शिवानी ने कहा कि- 10 साल की उम्र में पहली बार मेरे साथ वो हादसा हुआ, लेकिन जब दूसरी बार ऐसा हुआ, तो मैं पूरी तरह से बिखर गई थी.

मुझे नहीं पता था कि इसका क्या मतलब है और मैंने इसके बारे में किसी को नहीं बताया.. मुझे अपनी माँ के बारे में बताते हुए याद आया कि नशेड़ी ने मुझे असहज महसूस किया, क्योंकि वह अक्सर हमारे घर आता था. उसके बाद मैंने उसे कभी नहीं देखा..जब मैं 19 साल की हुई, तब इसी तरह की घटना दोबारा हुई थी..

मैं अपने परिवार से दूर एक छात्रावास में रह रही थी और मुझे पता नहीं था कि सब कुछ कैसे निपटना है.. जब मुझे आखिरकार पीटीएसडी (पोस्ट ट्रॉमैटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर) का पता चला, तो मुझे कई दवाएं दी गईं.. इसके बाद ही मेरे भाई और मैंने इसके बारे में अपने माता-पिता से बात करने का फैसला किया.

चूंकि भारत में मानसिक स्वास्थ्य एक वर्जित विषय है, इसलिए मेरे माता-पिता को यह समझने के लिए बहुत संघर्ष करना पड़ा कि क्या हो रहा है, और यह भी कि ऐसा क्यों हो रहा था..

एक बार, मैंने दवाइयों का सेवन किया.. ऐसा करने से मैं कुछ दिनों तक आईसीयू में पड़ी रही. तब मेरे भाई और माता-पिता मुझसे मिलने आए और मैंने उन्हें सब कुछ समझाया कि मेरे साथ क्या हुआ था.. वे हि’ल गए थे, लेकिन उन्होंने मेरा साथ दिया.

मेरी माँ मेरे साथ एक अलग शहर में तीन महीने तक रही, बस ताकि वह मेरे पास हो सके। जब मैं अपनी गर्मियों की छुट्टी के लिए उसके साथ घर वापस आई, तो मैंने फैसला किया कि जितना दर्द मैंने सहा है मैं दूसरों को ये दर्द सहने नहीं दूंगी.

इस अनुभव ने मुझे बहुत स्ट्रांग बना दिया. मैं कुछ हफ्तों के लिए दोस्तों के साथ बैठी रही. और फिर हमने मिलकर एक आंदोलन की शुरुआत की. जिसका नाम था ब्रेक द साइलेंस.. इस आंदोलन के साथ, मैंने छोटे बच्चों को अच्छे स्पर्श, बुरे स्पर्श और यौन शिक्षा के बारे में सिखाना शुरू किया..

क्योंकि बचपन में मुझे इन सब बातों का जरा भी ज्ञान नहीं था. इसके लिए मैंने बिहार, गुजरात और नेपाल की यात्रा की. स्वयंसेवकों के साथ, ब्रेक साइलेंस ने अब के रूप में अब तक लगभग 50,000 बच्चों को जागरूक किया है.. मैं उतने छोटे बच्चों को पढ़ाना चाहती हूं, जितना संभव हो सके.

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Naina Shrivastava

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