New Delhi: राम विलास पासवान एक ऐसे नेता जो गरीबों और दलितों के नेता कहे जाते थे. उन्होंने जिंदगी भर गरीबों की सेवा की. इनकी कहानी तो ऐसी है जिसे जानकर आप भी हैरान रह जाएंगे. वह आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी यादें हमेशा हमें याद रहेगी. बता दें कि राम विलास पासवान 6 प्रधानमंत्रियों के साथ काम कर चुके थे.

केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान का 74 साल की उम्र में निधन हो गया है.. उनके बेटे चिराग पासवान ने ट्वीट करके यह जानकारी दी.. रामविलास पासवान लंबे समय से बीमार थे.. मिलनसार पासवान हर राजनीतिक क्षेत्र में फिट बैठते थे.. यह इस कारण से है कि उन्होंने देश के 6 प्रधानमंत्रियों के साथ काम किया है.. उनके पास कई रिकॉर्ड भी हैं.. कहा जाता है कि राम विलास राजनीति के मौसम विज्ञानी थे, वे राजनीतिक मौसम को समझते थे..

रामविलास पासवान का जन्म 5 जुलाई 1946 को बिहार के खगड़िया जिले में हुआ था. वह 3 भाइयों में सबसे बड़े थे.. उनके बीच वाले भाई रामचंद्र पासवान की भी लगभग एक साल पहले मृत्यु हो गई थी.. अब उनकी पार्टी को बेटे चिराग पासवान संभाल रहे हैं..

रामविलास पासवान, जो एक केंद्रीय मंत्री थे, उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन में 11 चुनाव लड़े हैं.. अब तक वह 11 में से 9 चुनाव जीत चुके हैं.. बिहार में पासवान जाति में उनकी अच्छी पकड़ है.. रामविलास के राजनीतिक अपमान के कारण नीतीश कुमार ने पासवान जाति को महादलित में शामिल नहीं किया था.


रामविलास पासवान ने राजनीतिक करियर में 6 प्रधानमंत्रियों के साथ काम किया है.. वह पहली बार 1989 में वीपी सिंह की सरकार में मंत्री बने थे.. 1996 में दूसरी बार वे देवेगौड़ा और गुजराल की सरकार में रेल मंत्री बने.. रामविलास पासवान 1999 में अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में संचार मंत्री थे.. 2004 में, वह यूपीए में शामिल हो गए और मनमोहन सरकार में रसायन मंत्री बने..2014 में NDA में शामिल हुए और नरेंद्र मोदी की सरकार में खाद्य आपूर्ति मंत्री बने.


बहुत कम लोग जानते हैं कि रामविलास पासवान ने शुरू में बिहार पुलिस में काम किया था.. बिहार पुलिस की नौकरी छोड़कर राजनीति में आने वाले पासवान पहली बार 1969 में यूनाइटेड सोशलिस्ट पार्टी से बिहार विधानसभा के लिए विधायक चुने गए थे. उन्होंने सियासत के लिए DSP की नौकरी तक छोड़ दी थी.

रामविलास पासवान जेपी को अपना आदर्श मानते हैं.. वे अपने छात्र काल से ही समाजवादी आंदोलन में सक्रिय रूप से भाग लेते रहे हैं..आपातकाल की घोषणा के बाद उन्हें 1975 में गिरफ्तार किया गया था.. उन्होंने एक वर्ष से अधिक समय जेल में बिताया. रामविलास पासवान 1977 में जेल से रिहा हुए

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Lalit

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