New Delhi: इजराइली पेगासस से भारत में जासूसी के आरोपों के बाद लगातार जो खुलासे हो रहे हैं वह हैरानी में डालने वाले हैं। जासूसी लिस्ट में जो 300 भारतीय लोगों के नंबर होने की बात सामने आई है उसमें पत्रकार, विपक्ष के नेता, आम नागरिक यहां तक कि सरकार के मंत्रियों तक के नाम हैं। सरकार भले ही जासूसी के आरोपों को नकार रही है लेकिन इस जासूसी कांड से कुछ बड़े सवाल खड़े हो गए हैं जो बेहद चिंताजनक हैं।

पेगासस स्पायवेयर बनाए वाली इजराइल की कंपनी NSO ने अपने बयान में साफ-साफ कहा है कि वह अपना सॉफ्टवेयर केवल सरकारों को ही बेचती है। इजराइल की कंपनी के बयान से साफ़ है कि किसी भी देश में निजी कंपनियां उसका सॉफ्टवेयर नहीं खरीद सकतीं। मतलब अगर भारत में इजराइल की कंपनी के पेगासस स्पायवेयर का इस्तेमाल हुआ है तो उसे किसने खरीदा होगा? इसके लिए किसने भुगतान किया होगा और इस लिस्ट के नाम किसने तय किये होंगे? इसका जवाब सरकार को देना होगा या अब आप इन सवालों का जवाब खुद ही समझ लें।

इसके अलावा इजराइल में और भी कई कंपनियां हैं जो पेगासस के अलावा अन्य ब्रांड नेम से इस तरह के उपकरण और जासूसी सॉफ्टवेयर बेचतीं हैं। सभी के साथ शर्त यह है कि वहां का रक्षा मंत्रालय इस तरह के उपकरण और जासूसी सॉफ्टवेयर बिक्री को अनुमति देता है अर्थात बिना इजराइल सरकार की अनुमति के यह सॉफ्टवेयर प्राप्त नहीं किया जा सकता।

पेगासस स्पायवेयर से जासूसी का खुलासा करने वाले मीडिया हाउस 2019 के दौरान जासूसी की बात कह रहे हैं। यहाँ एक बात अहम है कि चार जुलाई 2017 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इजराइल की यात्रा की थी। नरेंद्र मोदी भारत के पहले प्रधानमंत्री हैं जिन्हे इजराइल की आधिकारिक यात्रा का श्रेय है।

यह जासूसी कांड, नागरिकों पर भारत के इतिहास का सबसे बड़ा हमला माना जा रहा है। इसके पहले भी सरकारें जासूसी कराती रही हैं, लेकिन इस पैमाने पर अनाधिकृत रूप से पहली बार हुआ है, वह भी निर्दोष लोगों के परिवारों पर। सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस रंजन गोगोई पर यौन शोषण का आरोप लगाने वाली महिला के अलावा, न केवल उसके पति, उसकी बहन और उसके परिवार के अन्य लोगों की जासूसी की गई।

इसी तरह दमोह के सांसद और मंत्री प्रहलाद पटेल के साथ हुआ। न केवल उनका फोन बल्कि उनकी पत्नी, ड्राइवर, खाना बनाने वाले कर्मचारी, माली इत्यादि का फोन भी टारगेट पर था। कोरोनाकाल में वायरस पर काम करने वाली डॉक्टर और वैज्ञानिक गगनदीप कंग तक का फोन हैक किया गया।

जहां तक पत्रकारों का सवाल है 300 नंबरों की लिस्ट में सिद्धार्थ वरदराजन, एमके वेणु, परंजॉय गुहा ठाकुरता, एसएनएम अब्दी, रोहिणी सिंह, स्वाति चतुर्वेदी, विजेता सिंह, सुशांत सिंह जैसे 40 नाम हैं जिनकी अधिकांश स्टोरी मोदी सरकार के लिए असहज स्थिति का कारण बनती रही हैं।

रोहिणी सिंह ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के बेटे जय शाह के कारोबार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के करीबी कारोबारी निखिल मर्चेंट को लेकर रिपोर्ट्स लिखने के बाद और प्रभावशाली केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल के बिजनेसमैन अजय पिरामल के साथ हुए सौदों की पड़ताल पर खबर ब्रेक की थी।

इंडियन एक्सप्रेस में डिप्टी एडिटर पत्रकार सुशांत सिंह अन्य रिपोर्ट्स के साथ फ्रांस के साथ हुई विवादित रफ़ाल सौदे को लेकर पड़ताल कर रहे थे। इस दौरान जुलाई 2018 में उन्हें निशाना बनाया गया।

पूर्व चुनाव आयुक्त अशोक लवासा का नाम भी लीक हुई उस सूची में शामिल है, जिन पर पेगासस स्पायवेयर के जरिये निगरानी रखने की योजना बनाई गई थी। अहम बात यह है कि साल 2019 के लोकसभा चुनाव के दौरान आचार संहिता उल्लंघन के आरोपों पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को दी गई क्लीनचिट का अशोक लवासा ने विरोध किया था।

अगर सियासी चेहरों की बात की जाये तो प्रमुख विपक्षी कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी का नाम भी इस लिस्ट में है। वही चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर का नाम भी इस लिस्ट में शामिल है जो पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी के लिए काम कर रहे थे। प्रशांत किशोर का नाम लिस्ट क्यों है अब इसका मतलब भी आप खुद ही समझ लें।

एक पत्रकार के मुताबिक अभी जो लोगों की लिस्ट आई है, उससे न केवल उनकी निजता पर असर पड़ा है बल्कि उन लोगों से बात करने वाले जितने भी लोग थे उन सब की बातें भी रिकॉर्ड की गई हैं। अब आप समझ लें, इसका पैमाना। यह पूरे देश के नागरिकों के लिए खतरे की घंटी है।

source- josh hosh

About Author

Naina Shrivastava

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *