New Delhi: इस दिन स्त्रियां निर्जल व्रत करती हैं..। एक पटरे पर मिट्टी की डली को गणेश जी के रूप में रखकर उनकी पूजा की जाती है और कथा सुनने के बाद लोटे में भरा जल चंद्रमा को अर्ध्य देकर ही व्रत खोला जाता है.. रात्रि को चंद्रमा को अर्ध्य देने के बाद ही महिलाएं भोजन करती है..

तिलकुटे से ही गणेश जी का पूजन किया जाता है तथा इसका ही बायना निकालते हैं और तिलकुट को भोजन के साथ खाते भी हैं..जिस घर में लड़के की शादी या लड़का हुआ हो, उस वर्ष सकट चौथ को सवा किलो तिलों को सवा किलो शक्कर या गुड़ के साथ कूटकर इसके तेरह लड्डू बनाए जाते हैं.. इन लड्डूओं को बहू बायने के रूप में सास को देती है..

कहीं-कहीं इस दिन व्रत रहने के बाद सायंकाल चंद्रमा को दूध का अर्ध्य देकर पूजा की जाती है.. गौरी-गणेश की स्थापना कर उनका पूजन तथा वर्षभर उन्हें घर में रखा जाता है.. तिल, ईख, गंजी, भांटा, अमरूद, गुड़, घी से चंद्रमा गणेश का भोग लगाया जाता है.. यह नैवेद्य रात भर डलिया से ढककर रख दिया जाता है, जिसे ‘पहार’ कहते हैं.. पुत्रवती माताएं पुत्र तथा पति की सुख-समृद्धि के लिए यह व्रत करती हैं.. उस ढके हुए ‘पहाड़’ को पुत्र ही खोलता है तथा उसे भाई-बंधुओं में बांटा जाता है..

सकट चौथ को ‘तिल चौथ’ या ‘माही चौथ’ के नाम से भी जाना जाता है.. गणेश जी ने इस दिन देवताओं की मदद करके उनका संकट दूर किया था.. तब शिव ने प्रसन्न होकर गणेश को आशीर्वाद देकर कहा कि आज के दिन को लोग संकट मोचन के रूप में मनाएंगे.. जो भी इस दिन व्रत करेगा, उसके सब संकट इस व्रत के प्रभाव से दूर हो जाएंगे..

महत्त्व
सकट चौथ का उपवास जो भी भक्त संपूर्ण श्रद्धा व विश्वास के साथ करता है, उसकी बुद्धि और ऋद्धि-सिद्धि की प्राप्ति होने के साथ-साथ जीवन में आने वाली विघ्न बाधाओं का भी नाश होता है.. सभी तिथियों में चतुर्थी तिथि श्री गणेश को सबसे अधिक प्रिय है..

About Author

Naina Shrivastava

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *