New Delhi: सपने वो नहीं होते जो आप सोने के बाद देखते हैं, सपने वो होते हैं जो आपको सोने नहीं देते… पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम का कथन ऐसे मेहनती पिताओं पर सटीक बैठता है. जिन्होंने अपने बच्चों को पढ़ाने के लिए हर चुनौती का सामना किया. जब सबसे कठिन परीक्षा कहे जाने वाले IAS के एग्जाम में बेटे का नाम देखा तो मजदूर पिता की आंखें नहीं रूकीं.

गरीब और मजदूर का बेटा IAS बन गया.पिता ने अपने बेटों के सपनों के लिए दिन को रात और रात को दिन बना दिया. आखिरकार बच्चों की जिम्मेदारी उठाना और उनको सफल बनाने का दायित्व इन्हीं के हाथों में होता है.

संघ लोक सेवा आयोग 2018 (यूपीएससी) में आईएएस प्रदीप सिंह को 93वीं रैंक मिली.. प्रदीप मूलरूप से बिहार के गोपालगंज के निवासी हैं.. मगर पिछले 25 साल से इनका परिवार इंदौर में रह रहा है.

प्रदीप सिंह के पिता मनोज सिंह ने बेटे को आईएएस बनाने के लिए घर बेच दिया..साथ ही घर का खर्च चलाने के लिए इंदौर के देवास रोड ​स्थित पेट्रोल पंप पर काम करने लगे..

हालांकि इनकी मजदूरी की कीमत इनके बेटे प्रदीप ने पहली बार में आईएएस परीक्षा पास करके चुका दी है.. प्रदीप ने अपने पिता के पसीने का मोल समझा और जीतोड़ मेहनत करके देशभर में नाम किया.

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Naina Shrivastava

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