New Delhi: कहते हैं माता-पिता अपने बच्चों की खुशियां परी करने के लिए जमीन आसमान तक एक कर देते हैं. खुद भूखे रहकर बच्चों का पेट भरते हैं, ताकि वह भविष्य में कुछ बन पाएं. आज हम आपको एक ऐसी ही भावुक कर देनी वाली कहानी बता रहे हैं. एक ऐसी बेमिसाल कहानी जिसे पढ़कर आप भी भावुक हो जाएंगे.

कहानी है पंजाब के अबोहर की. एक ऐसी बेमिसाल कहानी जिसने हर किसी को भावुक कर दिया. जिस परिवार में कोई भी 10वीं से ज्यादा नहीं पढ़ा था, उसी परिवार का एक सदस्य जज है. वो भी सिर्फ खुद की मेहनत और माता-पिता के बलबूते पर.

जब पंजाब न्यायिक सेवा परीक्षा के परिणामों की घोषणा हुई थी, तो उसमें बलवीर सिंह और आशा रानी के बेटे अजय सिंह का नाम आया. नाम आते ही खुद की आंखों पर भरोसा नहीं हुआ. सोचा नहीं था कि जिस सपने को पूरा करने के लिए माता-पिता ने खुद को आ’ग में तपाया. वो सपना पूरा हो चुका है. आंखों से खुशी के आंसू गिर पड़े.

किसी को यकीन नहीं हो रहा था कि उनके बेटे ने वो परीक्षा पास कर ली है. बेटे को सपना पूरा करता देख माता-पिता की खुशी का ठिकाना नहीं रहा. आखिरकार उनकी मेहनत सफल हो ही गई, क्योंकि उन्होंने अपने बेटे को अफसर जो बना दिया, जिसका सपना वह दिन-रात देखा करते थे.

लेकिन जो बेटा जज बना है उसके पीछे माता-पिता का संघर्ष छिपा है. माता-पिता ने अपने बेटे को पढ़ाने के लिए खुद को आ’ग में झोंक डाला. मां ने तंदूर में रोटियां सेंककर पैसा कमाई ताकि बेटे को पढ़ा सके.


इस कहानी की सबसे भावुक कर देने वाली बात ये है कि अजय सिंह के माता-पिता ने तंदूर पर रोटियां सेंककर अपने बेटे को पढ़ाया. काबिल बनाया. और इस मुकाम तक पहुंचाया. उनका कहना है कि वो खुद भी कभ-कभी मां के कामों में हाथ बंटाते थे. आज जज बनकर सभी के सामने बैठे अजय का कहना है कि एक वक्त ऐसा भी था जब उनके पास 9 वीं के बाद पढ़ने के लिए पैसे नहीं थे. लेकिन इतना पता था कि मेहनत कभी बेकार नहीं जाती. एक दिन सफलता कदम चूमेगी.

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Naina Shrivastava

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