जब मन में कुछ करने का हौसला हो तो अनपढ़ होना भी आपको हरा नहीं सकता इस बात को मिसाल के तौर पर गुजरात के अमरेली में रहने वाले 40 साल के उपेंद्र भाई राठौर साबित करके दिखाया है। उपेंद्र पिछले 15 सालों से किसानों के लिए कई इनोवेटिव मशीनों को बना रहे हैं। किसानों की हर जरुरत के अनुसार औजारों और मशीनों को ढ़ालने की कला उपेंद्र ने अपने पिता से विरासत में ली है। महज कक्षा 10वीं तक पढ़े हुए हैं लेकिन नई तकनीक की मशीनों के बारे उनकी पकड़ काफी अच्छी है। आइए जानते हैं उपेंद्र की इस 15 साल की यात्रा के बारे में…

उपेंद्र ने बताया कि ये मीशीनीकरण का हुनर उन्होंने अपने पिता से सीखा है। दरअसल उपेंद्र के पिता एक वर्कशॉप चलाते थे, जब उपेंद्र ने 10वीं कक्षा पास कर ली तो वे अपने पिता के साथ वर्कशॉप पर जाकर उनका हाथ बंटाने लगे थे। उन्हें मशीन और औजारों को बनाने की रुचि बचपन से ही थी और इसलिए वे अपने पिता की वर्कशॉप पर कुछ न कुछ इनोवेटिव करते ही रहते थे, मशीनों की हर छोटी से छोटी भाषा को समझना उन्होंने अपने पिता से ही सीखा था। जब वर्कशॉप पर किसन खेती के लिए औजार बनवाने आते थे तब उपेंद्र भी उनके साथ काम में मदद करते थे, और कुछ अलग करने की धुन को ही उपेंद्र ने अपना करियर बना लिया।

उपेंद्र भाई बताते हैं कि जब वे बी नेटवर्क से जुड़े तब उन्होंने अपने इस इनोवेटिव हुनर को सही दिशा देने का फैसला कर लिया। आपको बता दें कि उपेंद्र ने एक तिपहिया ट्रेक्टर का अविष्कार किया है जिससे किसानों को काफी मदद मिली है। उपेंद्र के इस इनोवेटिव ट्रेक्टर की मांग न सिर्फ भारत में बल्कि अफ्रीका जैसे देशों में भी है। अपनी इस प्रतिभा के लिए उपेंद्र को अवार्ड से भी नवाजा जा चुका है। इस ट्रेक्टर को बनाने की प्रेरणा उपेन्द्र साल 1994 में मनसुख भाई जगानी द्वारा बनाई गई बुलेटसांती को देते हैं। यह एक बुलेट मोटरसाइकिल से बना एक छोटा सा ट्रेक्टर है जो मुख्यत किसानों के लिए  बनाया गया था। इसी ट्रेक्टर यानि बुलेटसांती को और थोड़ा एडवांस करके इसे सनेडो ट्रेक्टर का रूप उपेंद्र की कला और लगन ने दिया। इस इनोवेटिव तिपहिया ट्रेक्टर से किसानों ो काफी राहत की सांस मिली है। यह ट्रेक्टर खेत में जुताई-बुवाई जैसे काम आसानी से पूरा कर सकता है, इसके साथ ही यह बडे ब्रांड के ट्रेक्टर की तुलना में भी सस्ता  भी है। इसकी कीमत 1 लाख 37 हज़ार रुपये से 1 लाख 60 हज़ार रुपये के बीच है।

उपेंद्र की इस कारगार खोज के लिए उन्हें सृष्टि सम्मान से भी नवाज़ा जा चुका है। इसके अलावा भी उपेंद्र ने किसानों की मदद के लिए कई छोटे-बड़े इनोवेशन किए हैं। उपेंद्र ने सृष्टि नाम की एक मशीन भी बनाई है जो गन्ने की पौध से आसानी से पत्ते निकाल देती है। किसानों को लगने वाले समय और चोट से मुक्ति के लिए ही इस मशीन को बनाया गया, इसकी कीमत लगभग 500 रुपये है।

आपको बता दें कि उपेंद्र भाई ने इस यंत्र को लॉकडाउन के दौरान बनाया है। अपनी इनोवेटिव खोज के जरिए उपेंद्र कृषि क्षेत्र को तकनीकि क्षेत्र में आगे बढ़ाने के लिए एक अहम भूमिका निभा रहे हैं। हमें उपेंद्र के इस सफल और किसानों के प्रति जिम्मेदार खोज करने पर गर्व है।

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Naina Shrivastava

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