New Delhi: आपने अस्पताल में अकसर डॉक्टरों को ऑपरेशन के दौरान हरे या नीले रंग के कपड़े पहने देखा होगा, लेकिन क्या आपने कभी नेटिस किया है कि आखिर अस्पताल के पर्दे से लेकर डॉक्टरों के मास्क और कपड़े नीरे या हरे रंग के ही क्यों होता है.

अगर वैज्ञानिक दृष्टिकोण से देखा जाए तो हमारी आंखों का जैविक निर्माण कुछ इस प्रकार से हुआ है कि ये हम इंसान लाल, हरा और नीला रंग देखने में सक्षम हैं.. इन रंगों के ही मिश्रण से बने अन्य करोड़ों रंगों को इंसानी आंखें पहचान सकती हैं..लेकिन इन सभी रंगों की तुलना में हमारी आंखें हरा या नीला रंग ही सबसे अच्छी तरह देख सकती हैं.

हरा या नीला रंग हमारी आंखों को चुभता नहीं है, बजाय लाल,पीले रंग के. हरे और नीले रंग से हमारी आंखों को सुकून मिलता है. डॉक्टर ऑपरेशन के समय हरे रंग के कपड़े इसलिए भी पहनते हैं, क्योंकि वह लगातार खून और मानव शरीर के अंदरूनी अंगों को देखकर मानसिक तनाव में आ सकते हैं, ऐसे में हरा रंग देखकर उनका मस्तिष्क उस तनाव से मुक्त हो जाता है.. कभी-कभी वह नीले रंग के कपड़ों में भी होते हैं. नीला रंग भी हमारे मस्तिष्क पर हरे जैसा ही प्रभाव डालता है..

वहीं, यह भी कहा जाता है कि पहले डॉक्टरों से लेकर अस्पताल के सभी कर्मचारी सफेद कपड़े पहने रहते थे, लेकिन साल 1914 में एक प्रभावशाली डॉक्टर ने इस पारंपरिक ड्रेस को हरे रंग में बदल दिया था. तब से यह चलन ही बन गया. हालांकि, कुछ-कुछ डॉक्टर नीले रंग के भी कपड़े पहनते हैं.

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Naina Shrivastava

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