New Delhi: हर किसी के जीवन में एक न एक लक्ष्य होता है। जिसे पाने के लिए जीवन भर मेहनत करनी होती है, लेकिन किसी की किस्मत साथ ले जाती है तो किसी के हाथ निराशा लगती है। ऐसा ही कुछ पटना की कंकड़बाग की रहने वाली अर्चना के साथ हुआ।

अर्चना ने बचपन से जज बनने का सपना देखा और आखिरकार अपने इस लक्ष्य का प्राप्त भी किया। अर्चना एक गरीब परिवार से थीं, जो उन्हें जज बनने के सपने देखने की इजाजत नहीं दे रहे थी।

एक छोटे से कमरे में उनका पूरा परिवार रहता था। उसी छोटे से कमरे में अर्चना ने जज बनने का ख्वाब संजोया और मेहनत की। अर्चना के पिता गौरीनंदन सोनपुर कोर्ट में चपरासी की नौकरी करते थे। वो जज के तमाम कामों को करते थे।

जरा सी गलती होने पर जज उनके पिता को डांटते थे, ये देख अर्चना को बिल्कुल भी अच्छा नहीं लगता था। पिता की कारण ही अर्चना ने जज बनने की ठानी और इसके लिए मेहनत में जुट गई। तब अर्चना स्कूल में थी। अर्चना ने शास्त्रीनगर राजकीय उच्च विद्यालय से स्कूली पढ़ाई पूरी की और आगे की शिक्षा पटना यूनिवर्सिटी से पूरी की।

कॉलेज शिक्षा के दौरान अर्चना छात्रों को कम्प्यूटर की कोचिंग देने लगी। इसी बीच उनके माता-पिता ने उनकी शादी करा दी। शादी होने के बाद उन्हें लगा कि अब उनका जज बनने का सपना पूरा नहीं हो पाएगा।

लेकिन कहते है ना कि किसी चीज को शिद्दत से चाहो तो कायनात मिलाने में जुट जाती है। शादी के बाद अर्चना ने आगे की पढ़ाई पूरी की और पुणे विश्वविद्यालय में एडमिशन लेकर एलएलबी की पढ़ाई की। साल 2014 में उन्होंने बीएमटी लॉ कॉलेज पूर्णिया से एलएलएम किया।

शादी के बाद उनका एक बेटा हुआ, पर उन्होंने जज बनने के सपने को जगाए रखा और अपने पांच साल के बेटे के साथ दिल्ली में पढ़ाई करने चली गई। इसमें उनके पति राजीव रंजन का भी खूब सहयोग मिला।

उनके पिता पटना मेडिकल कॉलेज अस्पताल में बतौर क्लर्क काम करते है। पति की मदद और अपने हौंसलो के कारण अर्चना का चयन बिहार न्यायिक सेवा में हो हुआ। सफलता को देख जो लोग तरह-तरह के ताने देते थे, आज वहीं बधाईयां दे रहे हैं।

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Naina Shrivastava

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