New Delhi: मदद चाहे 10 रुपए की हो या 10 लाख की.. मदद, मदद होता है. आपने कोरोना काल में लॉकडाउन के दौरान कई कहानियां सुनी. इस दौरान ऐसे कई लोग हैं जो दूसरों की मदद कर रीयल हीरो बनकर सामने आए. लेकिन दूसरी तरफ ऐसे भी कई लोग हैं, जिन्होंने मदद तो की, लेकिन उनका नाम ज्यादातर लोग नहीं जानते हैं. ये लोग ऐसे हीरों हैं, जिन्होंने अपने दम पर, अपने पैसों पर किसी को खाना खिलाया, या किसी को पनाह दी. आज हम ऑटो ड्राइवर अक्षक के बारे में बताते हैं.

अक्षय ऑटो चलाते हैं, बड़ी मेहनत से अपनी शादी के लिए 2 लाख रुपए जुटाए थे. लेकिन करोना काल ने उन्हें आम इंसान से खास बना दिया. हीरो भी वो अपने नेक दिल की वजह से बने. ऑटो चालक ने लॉकडाउन के दौरान 400 से भी ज्यादा प्रवासियों को रोजाना खाना खिलाया. वो भी अपने शादी के लिए जुटाए पैसों से. अक्षय ने दूसरों का पेट भरने के लिए सालों की मेहनत लगा दी. उसने अपनी शादी से पहले किसी का पेट भरना जरूरी समझा.

अक्षय पुणे में ऑटो चलाते हैं. उम्र 30 साल है. अक्षय की शादी इस साल 25 मई को होनी थी, जिसके लिए उन्होंने 2 लाख रुपए बचाए थे. हालांकि, उन्होंने और उनके मंगेतर ने COVID-19 महा’मा’री के कारण शादी को स्थगित करने का फैसला किया था.

कोई काम नहीं होने और कोई आमदनी न होने के कारण प्रवासी मज़दूरों की दु’र्दशा देखकर वह व्यथित था.. मूक दर्शक होने के बजाय, उन्होंने इसके बारे में कुछ करने का फैसला किया.. अक्षय ने अपने कुछ दोस्तों के साथ मिलकर अपनी शादी के लिए बचाए गए 2 लाख रूपए के साथ एक किचन की स्थापना की..

उन्होंने उस रसोई में खाना बनाना शुरू कर दिया और पुणे के कई स्थानों पर जरूरतमंदों को खाना बांटना शुरू किया. उन्होंने हर दिन लगभग 400 गरीब लोगों को खाना खिलाया..इतना ही नहीं.. इन सभी के बीच, अक्षय के पिता का भी दिल का दौरा पड़ने के कारण इस साल 18 मई को निधन हो गया.

अक्षय और उनके दोस्तों ने अपने ऑटो पर लाउडस्पीकर लगाए और पुणे की सड़कों पर घूमना शुरू कर दिया हैयय क्यों? ताकि जरूरतमंदों को उनके मुफ्त भोजन की पहल के बारे में सूचित कर सकें, और COVID-19 महामारी से सुरक्षित रहने के बारे में जागरूकता पैदा करना.

उनका अच्छा काम फैलने लगा। यह जानने के बाद कि अक्षय कैसे जरूरतमंदों तक पहुंच रहे हैं, लोगों ने अपने बटुए खोलना शुरू कर दिया और अपने मिशन को सशक्त बनाने के लिए दान करना शुरू कर दिया।

अक्षय ने कहा कि- जैसे जैसे लोगों को हमारे इस पहल के बारे में पता चला, लोग मदद के लिए आगे आते गए. हमें लगभग 6 लाख रुपए मिले, ताकि हम प्रवासियों को खाना खिला सकें. मैं उन लोगों द्वारा दिखाए गए इस प्रेम का आभारी हू. दयालु जिन्होंने हमारी पहल के बारे में पढ़ा, मदद के लिए आ आगे आए और मदद के लिए हाथ बढ़ाया.

अक्षय गर्भवती महिलाओं और बूढ़े नागरिकों को मुफ्त ऑटो की सवारी भी प्रदान करते हैं, जिन्हें किसी भी आपात स्थिति के लिए डॉक्टरों को देखने की आवश्यकता होती है.हर देश को अक्षय जैसे नायकों की जरूरत है.

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Naina Shrivastava

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