New Delhi: हम अक्सर सुनते हैं कि सरकारी स्कूलों में पढ़ाई ठीक तरह से नहीं होती है. सरकारी स्कूलों में पढ़ाई का ढर्रा ही अलग है. लेकिन अगर आप औरंगाबाद के इस गांव के सरकारी स्कूल के बारे में जान जाएंगे तो हैरान रह जाएंगे. ये स्कूल बाकी सभी स्कूल से बहुत आगे है.

औरंगाबाद के एक सरकारी स्कूल में पाठ्यक्रम में जापानी भाषा भी शामिल किया गया था, जिसे बच्चों को बोलना और पढ़ना सिखाया जाता था. औरंगाबाद से 25 किलोमीटर दूर गडिय़ावत में एक जिला परिषद के स्कूल के छात्र सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के माध्यम से जापानी भाषा सीख रहे हैं और बोल भी रहे हैं..

जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) सूरज प्रसाद जायसवाल ने बताया कि इस पहल का मुख्य उद्देश्य छात्रों को नौकरी उन्मुख शिक्षा प्रदान करना है.. “इस पहल के तहत, एक व्यक्ति भाषा की ऑनलाइन कक्षाएं ले सकता है. स्कूल के कई शिक्षकों ने भी जापानी भाषा सीखी है. मुख्य उद्देश्य छात्रों को नौकरी उन्मुख शिक्षा प्रदान करना है.

अजंता और एलोरा की गुफाओं में घूमने बहुत से जापानी पर्यटक आते हैं. यदि छात्र जापानी भाषा बोल सकते हैं, तो वे मार्गदर्शक बन सकते हैं.. स्कूल ने इस कार्यक्रम को पिछले साल लॉन्च किया था जिसके तहत कक्षा 4-8 में एक विदेशी भाषा चुनने के लिए कहा गया था जिसे वे सबसे अधिक सीखना चाहते हैं.. रोबोटिक्स और प्रौद्योगिकी में उनकी रुचि के कारण, जापानी भाषा को चुना गया.

कक्षा 8 की एक छात्रा सुएक्शा ने कहा, “हमें जापानी भाषा सीखने में मज़ा आता है.. हमने लेवल एक पूरा कर लिया है. हम जापानी भाषा में बात कर सकते हैं.. मैं जापान जाकर रोबोटिक्स सीखना चाहती हूँ.” कक्षा 6 की एक अन्य छात्रा अमृता राजेश ने कहा, “जापान एक प्रौद्योगिकी-संचालित देश है.. मैं वहां जाना चाहती हूं और तकनीक के बारे में सीखना चाहती हूं ताकि मैं भारत में भी ऐसा कर सकूं.

अगस्त में, जापानी भाषा और भाषाविज्ञान संस्थान के एक प्रोफेसर प्रशांत परदेशी, जो पिछले 25 वर्षों से जापान में रह रहे हैं, उन्हें जब इस पहल के बारे में पता चला, तब उन्होंने बच्चों को भाषा सीखने में मदद करने का फैसला किया..

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Naina Shrivastava

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