दुनिया भर की युवा पीढ़ी एक अलग ही जुनून और सोच लेकर आगे बढ़ रही है। ग्लोबल वार्मिंग और प्रदूषण की गहराती समस्या से निपटने के लिए हर तरफ युवा वर्ग आगे आकर मिसाल पेश कर रहे हैं। वातावरण को स्वच्छ और सुंदर बनाए रखने की इस मुहिम में देश के दो अलग अलग हिस्सों से एक साथ सामने आकर एक ही मकसद से पर्यायवरण के अनुकूल घर का निर्माण कर रहे हैं ये दोनों युवा स्टैनजिन और समयुक्ता। लद्दाख की नुब्रा घाटी के 24 साल के स्टैनजिन और तमिलनाडु के कोयंबटूर की रहने वाली 29 साल की समयुक्ता का अब सिर्फ एक ही मकसद है, पर्यायवरण को नुकसान न पहुंचाने वाले घरों का निर्माण करना। अपनी इस सोच को साकार करने के लिए दोनों ने मिलकर साल 2017 में “अर्थ बिल्डिंग” की स्थापना की। इनका यह एक ऐसा अनूठा प्रयास है जिसमें निर्माण के प्राकृतिक तरीकों से लोगों को परिचय कराया जाता है।

अर्थ बिल्डिंग का उद्देश्य पर्यायवरण के अनुकूल घर का डिजाइन तैयार करना है। दोनों ने अपने इस ‘अर्थ बिल्डिंग’ के जरिए कॉब, अर्थबैग, एडोब, स्टोन की चिनाई , रैम्ड अर्थ, कोब ओवन और रॉकेट स्टोव जैसी कई मिट्टी की तकनीकों का पता लगाकर कई भवनों का निर्माण किया है।

जी हां ‘अर्थ बिल्डिंग’ ने एक तरफ जहाँ लद्दाख में अर्थबाग डोम का निर्माण किया वहीं तमिलनाडु में एडोब फार्महाउस को भी बनाया है। घर का निर्माण करने में ‘अर्थ बिल्डिंग’ ने जिस तरह की वास्तुकला का प्रयोग किया है, उसकी प्रंशसा देश भर में हो रही है। इसके अलावा महाराष्ट्र के रत्नागिरी जिले के तलावली गाँव के लोग भी इनके इंटीरियल वर्क के बारे में जानते हैं।

बता दें कि स्टैनज़िन ने शिक्षाविद् सोनम वांगचुक के SECMOL से वास्तुकला का ज्ञान हासिल किया है। तो वहीं, समयुक्ता ने आर्किटेक्चर की डिग्री ली है। अपनी-अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद इन दोनों ने उदयपुर के स्वराज विश्वविद्यालय में दाख़िला लिया, जहां दोनों की मुलाकात हुई। दोनों में ही नई नई तकनीक सीखने और कुछ अलग कर प्रकृति को बचाने की धुन सवार थी। जिसके बाद दोनों ने वहां से अपने जुनून के लक्ष्य को आगे बढ़ते हुए, कोयम्बटूर के नजदीक वलूकुपरई गाँव में अपना पहला प्रोजेक्ट शुरु किया और पांच कमरे वाला अर्थबैग जिसमें सीमेंट की थैलियों से भरी मिट्टी होती है ऐसा डोम होम तैयार किया। आगे कई और प्रोजेक्ट्स पर काम करते हुए देशभर में कई जगह यात्राएं की और लोगों को मिट्टी की इन तकनीकों से बनने वाले घर के फायदे के बारे में जागरुक कराया। आपको बता दें कि ‘अर्थ बिल्डिंग’ तहत बनने वाले ये घर सीमेंट के घरों के मुकाबले अधिक ठंडे और आरामदायक होते हैं। इन अर्थबैग घरों को बनाना लकड़ी या स्टील के उपयोग की तुलना में बहुत अधिक किफायती होता है।   ‘अर्थ बिल्डिंग’ का कहीं भी कोई मुख्यालय या हेड ऑफिस नहीं है, ये लोग जहां भी घर बनाने के प्रोजेक्ट पर काम चल रहा होता है, वहां चले जाते हैं और प्राकृतिक तकनीक के उपयोग से इन घरों का निर्माण करते हैं। आज स्टैनजिन और समयुक्ता के साथ अलग-अलग प्रोजेक्ट्स पर कई अन्य छात्र इंटर्नशिप के तौर पर जुड़ चुके हैं और साथ मिलकर कई अन्य वास्तुकला का प्रयोग कर इस काम को आगे ले जा रहे हैं। इन दोनों की इस अनूठी पहल ने युवा वर्ग के लिए एक बेहतरीन छाप छोड़ी है।

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Naina Shrivastava

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