कोरोना की वजह से पूरी दुनिया ही पिछले 4 महीन से थम सी गई है, हर कोई इससे बाहर निकलने के लिए अपने अपने रास्ते तय कर रहा है। भारत में भी लोग इस लड़ाई में अपनी तरह से योगदान दे रहे हैं। जाहिर कि दौर बहुत ही मुश्किल है और इसी मुश्किल समय में कई लोग अपनी परवाह छोड़ दूसरों की सेवा के लिए आगे आए हैं। ऐसे ही, जम्मू और कश्मीर के श्रीनगर में रहनेवाली 23 साल की सीरत-उल-दिन लोगों को डिप्रेशन से निकालने में मदद कर रही हैं।

सीरत बांग्लादेश में मेडिकल की पढ़ाई कर रही थीं, लेकिन पूरी दुनिया में ही लॉकडाउन होने के कारण वे भी अपने घर, श्रीनगर लौट आईं। जब सीरत वापस घर लौटकर आईं तो उन्होंने एक अलग ही तरह की परेशानी लोगों में देखी जिसे हम आम भाषा में डिप्रेशन या तनाव कहते हैं। सीरत ने बताया कि कोरोना के चलते काम धंधा रुक जाने या कई अन्य वजहों से लोगों को अंदर ही अंदर डिप्रेशन की बीमारी ने घेर लिया है। सीरत ने बताया कि लोग डिप्रेशन के लिए डॉक्टर के पास जाना जरुरी नहीं समझते हैं और न ही किसी से इसके बारे में बात करना ही चाहते हैं, लेकिन सीरत ने खुद ही  ऐसे लोगों से मिलकर या ऑनलाइन माध्यम से जुड़कर डिप्रेशन से बाहर आने में मदद कर रही हैं। इस सेवाभाव के काम में सीरत का साथ एंडोक्राइनोलॉजी के विशेषज्ञ डॉ. शारिक मसूदी भी कर रहे हैं।

सीरत ने बताया कि उन्हें इस सम्सया के बारे में सबसे पहले फेसबुक पर बने तीस हजार लोगों के एक ग्रुप में पोस्ट कर किसी ने मदद मांगी थी, जहां सीरत ने उसकी कॉउनसिलिंग कर डिप्रेशन से बाहर आने में मदद की। उस शख्स ने इस समस्या से समाधान मिलने के बाद कई लोगों से डिप्रेशन होने पर मदद मांगने और बात करने के लिए कहा। जिसके बाद कई और लोगों ने डिप्रेशन को लेकर बात की।

दरअसल हमारे समाज में डिप्रेशन के लिए मानसिक रोग विशेषज्ञ के पास जाना लोग उचित नहीं समझते क्यों कि लोगों में यह भ्रम है कि साइकैट्रिस्ट के पास दिमागी हालत खराब होने की गंभीर हालत में जाया जाता है। इसी भ्रम में लोग खुलकर डिप्रेशन के बारे में बात भी नहीं करते हैं और अपने तनाव के बारें में कुछ भी साझा नहीं करते हैं। जब धीरे धीरे लोगों ने फेसबुक के माध्यम से इस बीमारी पर बात करना और समस्या साझा करना शुरु किया तो सीरत ने डॉ. मसूदी की मदद से लोगों की इससे बाहर आने में मदद की।आज करीब 150 लोग अपने तनाव और डिप्रेशन को लेकर खुलकर बातें साझा करने और मदद लेने के लिए सामने आए हैं। जिन्हें सीरत बड़ी ही सूझबूझ और डॉ. मसूदी की सलाह से उबारने में जुटी हुई हैं। न केवल सीरत लोगों इस मुहिम में फेसबुक से जुड़ी हुई हैं बल्कि वे खुद जाकर लोगों से मिलती हैं और उनकी परेशानियां सुनकर सही कदम उठाती हैं ताकि डिप्रेशन से उन्हें बाहर निकाला जा सके। इस मुश्किल दौर में डिप्रेशन में आए लोगों के लिए लड़ने वाली 23 साल की सीरत के जज्बे को हमारा हक सलाम करता है।

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Naina Shrivastava

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